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Tiredness during pregnancy: प्रेग्नेंसी में थकान होने के कारण और उपाय

Tiredness during pregnancy: प्रेग्नेंसी में थकान होने के कारण और उपाय

ज्यादातर महिलाओं में प्रेगनेंसी के दौरान थकान देखी जाती है इसलिए यह एक तरह की आम समस्या हैलगभग हर गर्भवती महिला को पहली तिमाही के दौरान थकान महसूस होती है,  इसलिए गर्भवस्था में थकान (tiredness during pregnancy in hindi) होना सामान्य है।

गर्भावस्था के दौरान जब गर्भवती महिला के शरीर में बदलाव होते हैं तब अक्सर उन बदलावों को अपनाते समय शरीर सुस्त पड़ने लगता है, जिससे थकान महसूस होती है।

गर्भावस्था के दौरान थकान कब तक बनी रहती है?

गर्भावस्था में थकान (tiredness during pregnancy in hindi) पहली तिमाही में शुरू होती है। दूसरी तिमाही में ज्यादातर महिलाओं की थकान कम हो जाती है, लेकिन तीसरी तिमाही शुरू होते ही गर्भावस्था में थकान (tiredness during pregnancy in hindi) फिर से महसूस होने लगती है।

गर्भवती महिलाओं को यह समस्या प्रेगनेंसी के अलग-अलग चरणों में कई कारणों से हो सकती है। कुछ गंभीर मामलों में थकान, किसी अन्य समस्या का संकेत भी हो सकती है, इसलिए ज्यादा थकान महसूस होने पर अपने डॉक्टर से इसकी जांच करवाएं।

प्रेगनेंसी में थकान होने के कारण (Causes of tiredness during pregnancy)

हर तिमाही में प्रेगनेंसी में थकान होने के कारण अलग-अलग हो सकते है। आइये आपको अलग-अलग कारण बताते है।

हार्मोनल बदलाव होना:

प्रेगनेंसी के दौरान (tiredness during pregnancy) महिला के शरीर में कई तरह के बदलाव होते हैं, जिसमें हार्मोनल बदलाव एक है। गर्भावस्था के दौरान प्रोजेस्टेरोन हार्मोन (progesterone hormone in hindi) की वृद्धि के कारण अक्सर थकान महसूस होती है।

नींद पूरी ना लेना:

कई महिलाओं को पर्याप्त नींद ना लेने की वजह से गर्भावस्था में थकान महसूस होती है।

पोषक तत्वों की कमी होना:

गर्भावस्था के दौरान (tiredness during pregnancy) पोषक तत्वों का महत्व अलग है। कई बार गर्भवती महिला के शरीर में पोषक तत्वों की कमी की वजह से उसे प्रेगनेंसी में थकान (tiredness in pregnancy in hindi) महसूस होती है।

ज्यादा काम करना:

घर के कामों में व्यस्त रहने वाली घरेलू महिलाएं ज्यादा काम काज करने की वजह से प्रेगनेंसी में थकान (tiredness during pregnancy in hindi) का अनुभव करती हैं। इसके अलावा नौकरी करने वाली गर्भवती महिलाओं को भी ऑफिस के कामकाज की वजह से थकान महसूस हो सकती है।

वजन बढ़ना:

गर्भावस्था के दौरान सभी महिलाओं का वज़न बढ़ता है। वज़न बढ़ने की वजह से अक्सर शरीर की पाचन क्रिया सुस्त हो जाती है और प्रेगनेंसी में थकान (tiredness in pregnancy in hindi) महसूस होने लगती है।

खून की कमी होना:

कुछ गंभीर मामलों में गर्भवती महिलाओं के शरीर में खून की कमी यानि एनीमिया (anemia in pregnancy in hindi) के कारण प्रेगनेंसी में थकान (tiredness during pregnancy in hindi) हो सकती है।

बीपी और शुगर कम होना:

कई बार गर्भावस्था की पहली तिमाही में महिला का बीपी (blood pressure in pregnancy in hindi) और शुगर (sugar in pregnancy in hindi) कम होने की वजह से प्रेगनेंसी में थकान (tiredness during pregnancy in hindi) महसूस होती है।

प्रेगनेंसी में थकान शिशु के लिए कितना हानिकारक है?

आमतौर पर गर्भावस्था में थकान (tiredness during pregnancy in hindi) शिशु के लिए हानिकारक नहीं होता। हालांकि कई बार प्रेगनेंसी के दौरान ज्यादा थकान होना गर्भवती के लिए गंभीर स्वास्थ्य संबंधी समस्या का संकेत हो सकता है।

विशेषज्ञ कहते हैं कि गर्भवती महिलाओं में खून की कमी यानि एनीमिया (anaemia in hindi) की वजह से उन्हें थकान महसूस हो सकती है और इसका असर गर्भ में पल रहे बच्चे के विकास पर भी पड़ सकता है। इस समय इसका इलाज संभव है।

इसके अलावा प्रेगनेंसी के दौरान कभी- कभी महिलाएं, क्रोनिक फटीग सिंड्रोम (chronic fatigue syndrome in hindi) यानि अत्यधिक थकान की शिकार हो जाती है, जो गर्भ में पल रहे शिशु को नुकसान पहुँचा सकती है।

गर्भावस्था में थकान कम करने के घरेलू उपाय (ways to reduce tiredness in pregnancy)

शरीर की जरूरतें समझें:

गर्भावस्था में थकान (tiredness in pregnancy in hindi) होने पर सबसे पहले आपको अपने शरीर की जरूरतों को समझना चाहिए। प्रेग्नेंसी की पहली तिमाही के दौरान आपको ज्यादा से ज्यादा आराम करने की जरूरत होती है। ऐसे में समय मिलने पर थोड़ा आराम करें।

अपनी दिनचर्या में बदलाव करें:

प्रेगनेंसी में थकान (tiredness during pregnancy in hindi) होने पर इसका असर गर्भवती महिला की दिनचर्या पर पड़ता है, इसलिए अपनी दिनचर्या को नियमित रखें। दिन में अपने हर काम के लिए समय निर्धारित करें और उसी के अनुसार काम करें।

पोषक तत्व युक्त खाना खाएं:

डॉक्टर कहते हैं कि जिन गर्भवती महिलाओँ की भोजन की थाली में भरपूर मात्रा में पोषक तत्व युक्त आहार होता है, उनमें ऊर्जा का स्तर ऊँचा होता है। पोषक तत्व युक्त भोजन में ज्यादा से ज्यादा प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट की मात्रा शामिल करें। आप पोषक तत्व युक्त भोजन में साबुत अनाज, दाल, हरी सब्जियां, फल, दूध और उससे बनी वस्तुएं, अंडा और मछली खा सकती हैं।

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डिस्क्लेमर: यह ब्लॉग किसी भी प्रकार से दवाई या डॉक्टर से लिया गया इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी समस्या के लिए डॉक्टर से  www.aayu.app पर परामर्श लें ।

 

 

 

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल:

(A) प्रेगनेंसी में पेट कब निकलता है?

पहली प्रेगनेंसी में गर्भावस्‍था की पहली तिमाही में बेबी बंप नहीं दिखता। आपको प्रेगनेंसी की दूसरी तिमाही में बेबी बंप दिख सकता है जो 12 और 16 सप्‍ताह है। अगर आपका वजन कम है तो आपका पेट 12वें सप्‍ताह के आसपास दिखना शुरू हो सकता है और अधिक वजन होने पर 16वें सप्‍ताह में दिख सकता है।

(B) गर्भावस्था में आयरन कब लेना चाहिए?

हीमोग्लोबिन बढ़ाने के लिए गर्भवती महिलाओं को आयरन की जरूरत होती है। खाने के आधे घंटे बाद ही आयरन की गोली लें।

(C) गर्भावस्था के दौरान क्यों जांघ दर्द?

यह प्रेगनेंसी में साइटिका का आम कारण होता है। ऐसा रिलैक्‍सिन नामक प्रेगनेंसी हार्मोन के बढ़ने की वजह से होता है जिससे लिगामेंट्स, हड्डियों को जोड़ों से जोड़ने वाली संरचनाएं ढीली पड़ जाती हैं या खिंच जाती हैं। शिशु के वजन के कारण भी कूल्‍हों और पेल्विक हिस्‍से पर दबाव पड़ सकता है।

(D) प्रेगनेंसी में प्राइवेट पार्ट में दर्द क्यों होता है?

गर्भाशय के बढ़ने की वजह से योनि में दर्द होना आम बात है। गर्भ में शिशु को जगह देने के लिए गर्भाशय फैलता है जिससे योनि और आसपास की मांसपेशियों पर दबाव पड़ता है। प्रेग्‍नेंसी में हार्मोनल बदलाव आते हैं जिससे योनि में सूखापन हो सकता है।

इस ड्राइनेस की वजह से योनि में खासतौर पर सेक्‍स के दौरान दर्द हो सकता है।

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COMMENTS

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    shyama prajapat 4 weeks

    Thanks

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