piles causes and treatment: बवासीर के कारण और इलाज

बवासीर के कारण

piles causes and treatment: आजकल हर तीसरे व्यक्ति में बवासीर या पाइल्स (piles) की समस्या देखी जाती है। बवासीर के कारण क्या हैं और इसका इलाज कैसे किया जाता है इसके बारे में सभी को जानना ज़रूरी है। दरअसल, बवासीर होने पर गुदा (एनस) के अंदर और बाहरी हिस्से की शिराओं (Outer Vein) में सूजन आ सकती है। इसकी वजह से गुदा के अंदरूनी हिस्से में या बाहर के हिस्से में कुछ मस्से जैसे बन जाते हैं, जिनमें से कई बार खून निकल जाता है और दर्द भी होता है। आइए इस लेख में आज हम आपको बताते है बवासीर के कारण और इलाज के बारे में। (piles causes and treatment)

आमतौर पर लोग यह बीमारी होने पर कहने में हिचकिचाते हैं या इसे नजरअंदाज करते हैं। जिसके कारण व्यक्ति को कब्ज, मल त्याग के दौरान दर्द व जलन व अन्य कई तरह की समस्याएं होती है।

वैसे बवासीर की समस्या किसी को भी हो सकती है, लेकिन अगर आपको बवासीर के लक्षण पता नहीं होंगे तो आपको परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। सबसे पहले आपको बवासीर के कारण और इलाज के बारे में बताते हैं।

बवासीर के कारण: Causes of Piles in Hindi:

  • कुछ व्यक्तियों को अपने रोजगार की वजह से घंटों खड़े रहना पड़ता है, और कई बार भारी वजन भी उठाना पड़ता है। ऐसे लोगों को बवासीर होने की संभावना ज्यादा होती है।
  • कब्ज बवासीर का एक प्रमुख कारण है। कब्ज में मल सूखा एवं कठोर होता है, जिसकी वजह से व्यक्ति को मलत्याग करने में कठिनाई होती है। काफी देर तक उकड़ू बैठे रहना पड़ता है। इस कारण से वहाँ की रक्तवाहिनियों पर जोर पड़ता है, और वह फूलकर लटक जाती है, जिन्हें मस्सा कहते है।
  • अधिक तला एवं मिर्च-मसाले युक्त भोजन करना।
  • शौच ठीक से ना हो पाना।
  • फाइबर युक्त भोजन का सेवन ना करना।
  • बवासीर का कारण महिलाओं में प्रसव के दौरान गुदा क्षेत्र पर दबाव पड़ने से बवासीर होने का खतरा रहना है।
  • शारीरिक गतिविधि कम करना।
  • बवासीर का कारण धूम्रपान और शराब का सेवन करना हो सकता है।
  • अवसाद में रहना। (यह भी पढ़ें: तनाव से दूर कैसे रहे)

बवासीर के प्रकार: Types of Piles in Hindi

बवासीर या पाइल्स एक खतरनाक बीमारी है। बवासीर 2 तरह की होती है।

खूनी बवासीर: खूनी बवासीर में आपको तकलीफ नहीं होती केवल आपको खून आता है। इसके अंदर मस्सा होता है जो अंदर की तरफ होता है फिर बाद में बाहर आने लगता है। कब्ज के द्वारा यह अपने से अंदर चला जाता है। अगर यह पुराना हो जाता है तो यह हाथ से दबाने पर ही अंदर जाता है। अगर यह आखिरी स्टेज पर पहुँच जाता है तब हाथ से दबाने पर भी यह अंदर नहीं जाता।

बादी बवासीर: बादी बवासीर रहने पर पेट खराब रहता है। इसमें कब्ज बना रहता है। गैस बनती है। बवासीर की वजह से पेट खराब ही रहता है ना कि पेट में गड़बड़ होने की वजह से बवासीर होती है। इसमें जलन, दर्द, खुजली, शरीर में बेचैनी, काम में मन ना लगना आदि चीजें हो सकती है। कब्ज बहुत मुश्किल से आने पर इसमें खून भी आ सकता है। इसमें मस्सा अंदर होता है। मस्सा अंदर होने की वजह से पखाने का रास्ता छोटा पड़ता है और चुनन फट जाती है और वहाँ घाव हो जाता है जिसे डॉक्टर की भाषा में फिशर कहा जाता है।

जिससे बिना सहन करने वाला जलन और पीड़ा होती है। बवासीर बहुत पुराना होने पर भगन्दर का रूप ले सकता है। भगन्दर में पखाने के रास्ते के बगल से एक छेद हो जाता है जो पखाने की नली में चला जाता है और फोड़े की शक्ल में फटता है, बहता है और सूखता रहता है। कुछ दिन बाद इसी रास्ते से पखाना भी आने लगता है। बवासीर, भगन्दर की आखिरी स्टेज होने पर यह केंसर का रूप ले लेता है। जिसको रिक्टम कैंसर कहते है जो जानलेवा हो सकता है।

बवासीर के लक्षण: Symptoms of Piles in Hindi

  • गुदा के आस-पास कठोर गाँठ जैसी महसूस होना जिसमें दर्द रहता है, तथा खून भी आ सकता है।
  • शौच के बाद भी पेट साफ ना होना
  • शौच के वक्त जलन के साथ लाल चमकदार खून का आना
  • शौच के वक्त बहुत ज्यादा पीड़ा होना
  • गुदा के आस-पास खुजली, एवं सूजन रहना (यह भी पढ़ें: जीभ में सूजन के कारण)
  • शौच के वक्त म्यूकस का आना
  • बार-बार मल त्यागने की इच्छा होना, लेकिन त्यागते समय मल ना आ पाना।

बवासीर के इलाज के घरेलू नुस्खे: Home Remedies of Piles in Hindi

एलोवेरा का इस्तेमाल करें: एलोवेरा के सूजनरोधक और चिकित्सकीय गुणों से बवासीर की जलन कम हो जाती है, और कब्ज की समस्या नहीं होती। यह आंतरिक और बाह्य दोनों प्रकार के पाइल्स के इलाज में लाभदायक होता है। गुदा के बाहर के मस्सों में एलोवेरा जेल लगाएँ। यह जलन और खुजली को शांत करता है। एलोवेरा के 200-250 ग्राम गूदे को खाएं। इससे कब्ज नहीं होता और मल त्यागने में आसानी होती है।

सेब के सिरके का इस्तेमाल करें: सेब का सिरका अपने कषाय गुणों के कारण रक्तवाहिनियों को सिकोड़ने में मदद करता है। खूनी बवासीर में एक गिलास पानी में सेब के सिरके का एक चम्मच डालकर दिन में दो बार पिएँ। बादी बवासीर में सेब के सिरके में रुई भिगोकर गुदा में रखें। इससे जलन और खुजली से राहत मिलती है।

जैतून के तेल का इस्तेमाल करें: जैतून के तेल में सूजन ठीक करने वाले गुण होते हैं। यह रक्तवाहिकाओं में आने वाले सूजन को कम करता है। जैतून के तेल को बादी बवासीर के मस्सों पर लगाएँ।

बादाम के तेल का इस्तेमाल करें: शुद्ध बादाम के तेल में रुई को डुबोएं, तथा बादी बवासीर में मस्सों पर लगाएं। यह सूजन और जलन को कम करता है।

नारियल का इस्तेमाल करें: नारियल की जटाओं को जलाकर राख या भस्म बना लें। इसे ताजे मट्ठे में मिलाकर सुबह खाली पेट नियमित रूप से पिएँ।

अंजीर का इस्तेमाल करें: तीन अंजीर एक गिलास पानी में भिगोएं। सुबह खाली पेट इसका सेवन कर, इस पानी को पिएँ।

जीरे का इस्तेमाल करें: बादी बवासीर में दर्द और जलन होने पर जीरे के दानों को पानी के साथ पीसकर लेप बनाएं। इसे मस्सों वाली जगह पर लगाएं।

नींबू का इस्तेमाल करें: नींबू के रस में अदरक और शहद मिलाकर सेवन करें। इससे पाइल्स में फायदा पहुँचता है।

अजवाइन का इस्तेमाल करें: मट्ठा बवासीर रोग में अमृत के समान है। एक गिलास छाछ में एक चौथाई अजवाइन पाउडर, और एक चम्मच काला नमक मिलाकर रोजाना दोपहर के खाने में इसका सेवन करें। यह बवासीर से आराम पाने का अच्छा घरेलू उपचार है। 

पपीता का इस्तेमाल करें: रात के भोजन में पपीता खाएं। इससे कब्ज नहीं होती। इससे मल त्यागने के समय होने वाली पीड़ा नहीं होती।

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