कार्डियक अरेस्ट के 11 लक्षण, कारण और इलाज जानें

कार्डियक अरेस्ट

कार्डियक अरेस्ट एक दिल संबंधी गंभीर स्थिति है। आपको बता दें कि इसमें “अरेस्ट” शब्द का मतलब गति को रोकना या कुछ देर स्थिर होना होता है। इसमें दिल धड़कना बंद हो जाता है। इस स्थिति को “सडन कार्डियक डेथ” (Sudden cardiac death) कहा जाता है। इस स्थिति में आपको सांस लेने में दिक्कत, होश गुम होने लगते है।

अचानक कार्डियक अरेस्ट आमतौर पर हृदय में हुए इलेक्ट्रिकल डिस्टर्बेंस (विद्युत तंरगों में अशांति) से होता है। यह आपके दिल के पंपिंग के काम में रुकावट डालता है और इससे आपके शरीर के दूसरे हिस्सों में रक्त प्रवाह (ब्लड सर्कुलेशन) बंद हो जाता है।

यह अरेस्ट तेजी से होता है, इसमें मरीज को संभलने का समय नहीं मिलता। टेस्ट करवाने से पहले ही मरीज की सांसे नहीं बचती। इस अरेस्ट के बाद अगर कोई व्यक्ति बचता है तो डॉक्टर कार्डियक अरेस्ट का कारण पता लगाने के लिए काफी टेस्ट करते है। इसमें ईसीजी (इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम) सबसे सामान्य टेस्टों में से एक है जिसको तीव्रता से कर सकते है।

कार्डियक अरेस्ट को कैसे पहचाने और इसके क्या-क्या लक्षण हैं।

कार्डियक अरेस्ट के लक्षण
cardiac arrest symptoms

कार्डियक अरेस्ट के लक्षण: (Cardiac Arrest Symptoms)

  1. अचानक से गिरना
  2. चेहरे का रंग ग्रे हो जाना
  3. बेचैनी होना
  4. सांस रुकना
  5. बेहोशी जैसी स्थिति होना
  6. खांसी होना
  7. मतली और उल्टी होना
  8. छाती में दर्द होना
  9. आंखों के आगे अंधेरा आ जाना
  10. चक्कर आना
  11. घबराहट होना

आइये जानते हैं यह किन-किन वजह से होता है।

कार्डियक अरेस्ट के कारण: (Cardiac arrest causes)

दिल की धड़कनें अनियमित होना इसका कारण हो सकती है, जो हृदय में विद्युत प्रणाली (electrical system) संबंधी किसी समस्या के परिणास्वरूप होती है।

  • दिनभर बैठना
  • हाई बीपी
  • पोटेशियम या मैग्नीशियम की कमी होना
  • हाई कोलेस्ट्रॉल लेवल होना
  • धूम्रपान करना
  • डायबिटीज की समस्या
  • नशीले पदार्थों का उपयोग करना

कार्डियक अरेस्ट से बचाव (Cardiac Arrest Prevention)

  • पोषक तत्वों से भरपूर और संतुलित आहार खाएं
  • डायबिटीज को कंट्रोल में रखें
  • खून में कोलेस्ट्रोल के स्तर को सामान्य स्तर पर रखें
  • तनाव ना लें
  • शारीरिक रूप से सक्रिय रहें
  • ब्लड शुगर को सुरक्षित स्तर पर रखें

कार्डियक अरेस्ट के इलाज को लेकर ज्यादातर लोगों को जानकारी नहीं होती जिस वजह से मरीज को तुरंत इलाज नहीं मिल पाता। इसलिए आपको इस का इलाज पता होना चाहिए।

कार्डियक अरेस्ट का उपचार: (Cardiac Arrest Treatment)

कार्डियक अरेस्ट आने के कुछ ही मिनटों के अंदर अगर मरीज को डॉक्टर के पास पहुंचा दिया जाए तो रोगी की जान बचा सकते है। ऐसी अवस्था में मरीज को कार्डियोपल्मनेरी रेसस्टिसेशन (CPR) दिया जाता है जिसकी मदद से उसकी दिल की धड़कन को नियमित करने का प्रयास किया जाता है। इस दौरान डिफाइब्रिलेटर की मदद से मरीज को बिजली के झटके भी दिए जाते हैं जिससे दिल की धड़कन दोबारा शुरु हो जाए।

कार्डियोपल्मनेरी रेसस्टिसेशन (CPR) से जान बचाने के लिए आपको इसके बारे में जानकारी होनी चाहिए। आइये बताते है CPR कैसे देते है।

  • मरीज को समतल और कठोर जगह पर लिटाएं, यह आपको बहुत जल्दी करना होगा इस बात का ध्यान रखें।
  • लिटाने के बाद अपने दोनों हाथों की उंगलियों को आपस में फंसाकर मरीज की छाती को कम-कम अंतराल के बाद दबाएं।
  • इंसान की सामान्य हार्ट बीट 60-100 होती है। इसलिए कोशिश करें कि 1 मिनट में 60 बार मरीज की छाती दबाएं।
  • बीच-बीच में उसकी नाक को बंद करके तेजी से उसके मुँह में फूंक मारें।
  • इस प्रक्रिया में आप तेज-तेज छाती को दबाएं।
  • सीने को इतनी तेजी से दबाएं कि हर बार सीना करीब डेढ़ इंच नीचे जाए।

डिस्क्लेमर: कार्डियक अरेस्ट होने पर आयु ऐप पर मौजूद विशेषज्ञ डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें। आयु ऐप डाउनलोड करके आप अपने फोन पर रोज़ाना सेहत की बातें और टेलीमेडिसिन की सुविधा घर बैठे प्राप्त कर सकते हैं।

किसी भी अन्य स्वास्थ्य समस्या की जानकारी के लिए आप हेल्पलाइन नंबर 781-681-11-11 पर कॉल करके एक्सपर्ट डॉक्टर से परामर्श पा सकते हैं। 

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