मक्के के फायदे और नुकसान | Daily Health Tip | 22 April 2020 | AAYU App

Pros and Cons of Corn

भुट्टे में भरपूर मात्रा में विटामिन-सी, मैग्नीशियम, फॉस्फोरस,और फोलेट पाया जाता है। इसमें फाइबर होता है, जो पाचन के लिए अच्छा होता है और इसमें मौजूद फाइटोकेमिकल्स कई बिमारियों से छुटकारा दिलाता है।

Corn is rich in vitamin C, magnesium, phosphorus and folate. Fibres present in it are good for digestion and phytochemicals present in it help to get rid of many diseases.

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मक्‍का एक अनाज का पौधा (grain plant) है जो मेक्सिको में पैदा हुआ था। मकई के बीजों में बहुत से पोषक तत्‍व होते है जिनके कारण इनका उपभोग करना लाभकारी होता है। मक्‍के की कई प्रजातियां होती है इनकी विविधता के आधार पर यह कई रंगों के होते है। मक्‍का का एक और प्रकार होता है जिसे मीठा मक्‍का (sweet corn) कहा जाता है जिनमें पोषक तत्‍वों के साथ चीनी अधिक मात्रा में होती है और स्‍टार्च बहुत ही कम मात्रा में होता है।

मक्के के फायदे:

कैंसर को रोकने में मददगार: मकई एंटीऑक्‍सीडेंट का एक समृद्ध स्रोत है जो कैंसर पैदा करने वाले मुक्‍त कणों (free radicals) से लड़ता है। कई अन्‍य खाद्य पदार्थों की अपेक्षा मक्‍के का उपयोग करने से आप अपने आहार में एंटीऑक्सिडेंट (antioxidant) गुणों को बढ़ा सकते है। यह फेरिलिक एसिड नामक एक फेनोलिक यौगिक का एक समृद्ध स्रोत है। मक्‍के में एंटी-कार्सिनोजेनिक (anti-carcinogenic) एजेंट होते है जो स्‍तन और यृकत कैंसर के कारण ट्यूमर से लड़ने में मदद करता है। बैंगनी मक्‍का में पाए जाने वाले एंथोकाइनिन, मुक्‍त कणों को खोजने का काम करते है जो कैंसर का कारण होते है। विभिन्‍न प्रकार के कैंसरों के प्रभाव को एंटीऑक्‍सीडेंट (antioxidant) के सहायता से कम किया जा सकता है।

मक्के के तेल के फायदे: मकई के तेल में एंटीएथेरोगेनिक प्रभाव (antiatherogenic effect) होते है जो कोलेस्ट्रॉल के स्‍तर को कम करने में मदद करता है। इस प्रकार यह कार्डियोवैस्‍कुलर (cardiovascular ) बीमारियों से हमारी रक्षा करता है। मकई का तेल दिल के स्‍वास्‍थ्‍य के लिए बहुत फायदेमंद होता है क्‍योंकि इसमें ओमेगा-3 फैटी एसिड अच्‍छी मात्रा में होता है जो खराब कोलेस्‍ट्रोल (bad cholesterol) को नियंत्रित करता है। मकई खराब कोलेस्‍ट्रोल को हटा कर धमनीयों (Arteries) को अवरुद्ध होने से रोकता है इस कारण यह आपके रक्‍तचाप (Blood Pressure) को कम करता है और दिल का दौरा और स्ट्रोक (heart attack and stroke) के खतरे को कम करता है।

अल्ज़ाइमर रोग को रोकने में मददगार: थाइमाइन की अच्छी मात्रा मकई मे होती है जो आपकी शक्ति को बढ़ाने के साथ-साथ मस्तिष्‍क कोशिका और ज्ञान संब‍धी क्रिया (cognitive function) को बढ़ाने के लिए मदद करता है। एसिटाइलॉक्लिन के संश्‍लेषण के लिए भी इसकी आवश्‍यकता होती है, जो स्‍मृति के लिए आवश्‍यक एक न्‍यूरोट्रांसमीटर है और जिसकी कमी के कारण मानसिक क्रिया (mental function) और अल्‍जाइमर रोग से संबंधित परेशानियां हो सकती है।

आँखों के लिए मक्के के फायदे: पीले मकई के दानों में कैरोटीनोइड नामक पदार्थ होता है जो मैकुलर अपघटन (macular degeneration) के खतरे को कम करता है जिसका सीधा संबंध आपके देखने की क्षमता से संबंधित होता है। मक्‍के में मौजूद बीटा कैरोटीन विटामिन ए बनाने में मदद करता है।

मधुमेह (Diabetes) को रोकने में फायदेमंद: भुट्टा जैसे कार्बिनिक फल (Organic fruits) और सब्जियां मधुमेह के लक्षणों को कम करने में मदद करते है। मकई के दानों का नियमित सेवन करने से इंसुलिन की अनुपस्थिति में मधुमेह को नियंत्रित करने में मदद मिलती है। साथ ही मकई के दानों में उपस्थित फाइटोकेमिकल्‍स उच्च रक्तचाप को कम करने में मदद करते है। फाइटोकेमिकल्‍स शरीर में इंसुलिन के अवशोषण और मुक्‍त (absorption and release ) होने को नियंत्रित करते है। इसके अलावा मक्‍का में पैंटोथिनेक एसिड भी होता है यह विटामिन बी, कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और लिपिड चयापचय (Metabolism) में मदद करता है। इसलिए यह एड्रेनल ग्रंथियों (adrenal glands) को बढ़ाकर तनाव को कम करता है।

गर्भवती महिलाओं के लिए मददगार: फोलिक एसिड की अच्‍छी मात्रा होने के कारण मकई गर्भवती महिलाओं (Pregnant women) के लिए बहुत ही महत्‍वपूर्ण होता है। गर्भवती महिलाओं में फोलिक एसिड की कमी के कारण होने वाले बच्‍चे का वजन कम हो सकता है और साथ ही जन्‍म के समय तंत्रिका ट्यूब मे भी नुकसान (neural tube defects) हो सकता है। इसलिए गर्भवती महिलाओं को अपने आहार मे मक्के को शामिल करना चाहिए क्‍योंकि इससे मां और बच्‍चे दोनों को स्‍वास्‍थ्‍य लाभ होता है। हांलाकि उच्‍च रक्‍तचाप या हाथ-पैर की सूजन होने की स्थति में डॉक्‍टर से संपर्क करना चाहिए।

मक्का वजन बढ़ाने में सहायक: वह लोग जिनका वजन कम होता है उन्‍हें अपने आहार में कैलोरी (calories) की मात्रा बढ़ाने की आवश्‍यकता होती है ताकि उनके शरीर का वजन बढ़ सके। मक्‍के में कैलोरी और कार्बोस बहुत अधिक मात्रा में होते है जो आपके शरीर के वजन को बढ़ाने में मदद करते है।

मक्के एनीमिया में फायदेमंद: विटामिन बी 12 और फोलिक एसिड (folic acid) की कमी के कारण एनीमिया होता है। मकई में आयरन अच्‍छी मात्रा में होता है जो नयी लाल रक्‍त कोशिकाओं के निर्माण के लिए आवश्‍यक खनिजों में से एक है। मक्के का नियमित और संतुलित उपभोग कर आप लोहे की कमी से होने वाले एनीमिया रोग (anemia) की संभावनाओं को कम कर सकते है।

कोलेस्ट्रॉल को कम करने में फायदेमंद: खराब कोलेस्‍ट्रोल फैटी भोजन का सेवन करने के कारण बढ़ता है जो आपके दिल को कमजोर करता है कार्डियोवैस्‍कुलर बिमारियों का कारण बनता है। मीठे मकई विटामिन सी, कैरोटीनोइड और बायोफ्लावोनोइड्स में समृद्ध होते है जो कोलेस्‍ट्रॉल के स्‍तर को कम करके रक्‍त प्रवाह को बढ़ावा देते है जो आपके दिल को स्‍वस्‍थ्‍य रखने के लिए आवश्‍यक होता है। मक्के के तेल मे एंटीएथेरोगेनिक (antiatherogenic) प्रभाव होता है जो शरीर द्वारा कोलेस्‍ट्रोल के अवशोषण को कम करता है और आपके शरीर को स्वस्थ रखता है।

ऊर्जा बढ़ाने में फायदेमंद: स्‍टार्च की अधिक मात्रा होने के कारण मकई को स्‍टार्च वाली सब्‍जी माना जाता है। मक्के में कार्बोहाइड्रेट की भरपूर मात्रा होती है जो आपको लंबे समय तक ऊर्जा दिलाने में मदद करता है। मक्‍का आपके मस्तिष्‍क और तंत्रिका तंत्र (nervous system) की कार्य क्षमता को भी सुधारता है। एक कप मक्के में 29 ग्राम कार्बोस होता है जो आपकी ऊर्जा (Energy) को बढ़ाने में मदद करता है। इस कारण यह एथलीटों के लिए बहुत फायदेमंद होता है क्‍योंकि उन्‍हें ज्‍यादा कार्बोस की आवश्‍यकता होती है।

पाचन के लिए लाभदायक: फाइबर की अच्‍छी मात्रा मक्के में होती है जिसमें घुलनशील और अघुलनशील ( soluble and insoluble) दोनों प्रकार के फाइबर होते है। घुलनशील फाइबर एक जेल (Jel) में बदलकर कोलेस्‍ट्रोल के अवशोषण को रोकने में मदद करते है जबकि अघुलनशील फाइबर नरम और भारी मल को बढ़ावा देकर कब्‍ज और आंतों की समस्‍याओं को रोकता है। जिससे दस्‍त की संभावना को कम की जा सकती है। इस प्रकार यह पाचन समस्‍याओं (digestive problems) जैसे कब्‍ज, बवासीर के साथ-साथ कोलन कैंसर को रोकने में मदद करता है। मक्के में अघुलनशील फाइबर की मात्रा ज्‍यादा होती है जो आपके पाचन संबंधी समस्‍याओं को दूर करने में लाभकारी होते है।

त्वचा सम्बंधित समस्याओं में लाभदायक: स्‍टार्च (starch ) का प्रयोग कई कॉस्‍मेटिक उत्‍पादों में उपयोग किया जाता है जो कि मक्‍का में भरपूर मात्रा में होता है। इस कारण मक्‍का त्‍वचा के चकते और जलन को शांत करने के लिए उपयोग किया जाता है। रासायनिक सौंदर्य उत्‍पादों के निर्माण के समय इनमें कई कैंसरजन्‍य (Carcinogenic) पेट्रोलियम उत्‍पादों को मिलाया जाता है जो त्‍वचा छिद्रों को बंद कर सकते है और त्‍वचा को नुकसान पहुंचा सकते है। इसलिए आप अपनी त्‍वचा को हानिकारक सौंदर्य उत्‍पादों से बचाने के लिए मक्के का उपयोग कर सकते है।

मक्के के नुकसान:

  • मक्के में फाइबर की मात्रा बहुत अधिक होती है। य‍दि आप ज्‍यादा मात्रा में इसका सेवन करते है तो अपच, पेट की ऐंठन जैसी समस्‍याओं को बढ़ावा देते है।
  • मीठे मक्के को कच्चा नहीं खाना चाहिए क्‍योंकि इससे दस्‍त हो सकता है और यह आंतों के कई विकारों को भी बढ़ा सकता है।
  • भुट्टा मधुमेह से ग्रस्‍त लोगों को नकारात्‍मक रूप से प्रभावित कर सकता है क्‍योंकि इसमे कार्बोहाइड्रेट अधिक मात्रा मे होता है जो रक्‍त शुगर के स्‍तर को बढ़ा सकता है। इसलिए मधुमेह रोगी को अधिक मात्रा में मक्के का सेवन करने से बचना चाहिए।
  • कुछ लोगों में मक्के का ज्‍यादा सेवन करने से गैस, पेट फूलना, और सूजन जैसी समस्‍याएं हो सकती है।
  • जो लोग आहार के रूप में मक्के का उपयोग करते है उन्‍हें ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा हो सकता है, क्‍योंकि मीठे मक्के में कैल्शियम बहुत ही कम मात्रा मे होता है।
  • जो लोग अपना वजन कम करना चाहते है उन्‍हें मक्के का ज्‍यादा सेवन नहीं करना चाहिए। क्‍योंकि यह उनके वजन को और ज्‍यादा बढ़ा सकता है।

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