ARTHRITIS | गठिया से ना रुके जीवन, जानें प्रकार, लक्षण, बचाव व उपचार

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अर्थराइटिस (Arthritis) या गठिया जोड़ों में होने वाली एक बीमारी है जो तेज़ी से बढ़ती जा रही हैं।

अमूमन पहले ये माना जाता था कि ये समस्या बुज़ुर्गों में ज़्यादा पायी जाती है लेकिन अब नौजवानों में भी ये समस्या बहुत आम होती जा रही है। ये स्थिति गंभीर हैं।

इस बीमारी में व्यक्ति के जोड़ों में तीव्र दर्द होता है। प्रभावित व्यक्ति को जोड़ों को हिलाने, मोड़ने या घुमाने में बहुत तकलीफ होती है। ये स्थिति बहुत पीड़ादायक होती है। इससे व्यक्ति की दैनिक जीवनशैली प्रभावित होती है। यह असहनीय दर्द जीवनपर्यंत रहता है अगर इस पर ध्यान नहीं दिया जाए।

जोड़ों की झिल्ली में सूजन आ जाने पर गठिया (Arthritis) की समस्या होती है। यह किसी भी जोड़ में हो सकती है पर ज़्यादातर घुटने इससे प्रभावित होते हैं।

गठिया के प्रकार (Types of Arthritis)

डीजेनेरेटिव अर्थराइटिस: 50 से  60 की उम्र के भारतीयों में यह प्रकार बहुत आम है। इसमें कार्टिलेज का डीजेनेरेशन यानी घिसना व टूटना-फूटना पाया जाता है। यह किसी भी जोड़ में हो सकता है। यह समस्या ज़्यादातर मोटापे, खराब पोषण व महिलाओं में ख़ासकर विटामिन-डी की कमी से होता है।   

रूमेटॉयड अर्थराइटिस: सबसे ज़्यादा पाया जाने वाला अर्थराइटिस (Arthritis) का प्रकार यही है। यह एक गंभीर समस्या है जिसका समय पर इलाज अति आवश्यक है। सही इलाज ना होने की स्थिति में यह कम समय में ही जोड़ों को बहुत नुकसान पहुंचा देता है।

सोराइटिक अर्थराइटिस: सोराइटिक अर्थराइटिस की गंभीरता का अंदाज़ा इसी से लगाया जा सकता है कि समय पर इलाज ना कराने पर यह बीमारी लाइलाज हो जाती है।

ओस्टियोसोराइसिस: यह अर्थराइटिस (Arthritis) का आनुवांशिक प्रकार है। बढ़ती उम्र के साथ जब शरीर अपना भार उठाने में असमर्थ होने लगता है तब यह अवस्था उत्पन्न होती है। सबसे ज़्यादा प्रभावित होने वाले जोड़ों में शामिल है पीठ, कमर, घुटना और पैर।

इन प्रकारों के अलावा कुछ और प्रकार है:

  • पोलिमायलगिया रूमेटिका
  • एनकायलाजिंग स्पोंडिलाइटिस
  • रिएक्टिव अर्थराइटिस
  • गाउट या गांठ
  • सिडडोगाउट
  • सिस्टेमिक लयूपस अर्थिमेटोसस
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गठिया के लक्षण (Symptoms of Arthritis):

  • प्रारम्भिक लक्षणों में तेज़ दर्द
  • जोड़ों का जाम हो जाना
  • सूजन आना
  • चलने-फिरने में तकलीफ होना
  • जोड़ों में भारीपन आना
  • उठते बैठते समय परेशानी
  • समस्या बढ़ने के साथ घुटनों का टेढ़ा होना
//youtu.be/k7Yi4Op171A?list=UUYmUH90TFuJM1XZK9MPkyWA

गठिया होने के कारण (Causes of Arthritis)

  • बढ़ती उम्र
  • पोषण की कमी
  • मोटापा
  • महिलाओं में एस्ट्रोजन की कमी
  • शरीर में आयरन व कैल्सियम की अधिकता
  • हाई ब्‍लड प्रेशर
  • किडनियों का ठीक प्रकार से काम ना करना

गठिया का परिक्षण (Diagnosis of Arthritis):

  • गठिया के लक्षण से इसका पता लगाया जा सकता है जैसे जोड़ों में तेज़ दर्द, सूजन, अकड़, जोड़ों में तक-तक की आवाज़ आना
  • कुछ जांचों द्वारा जैसे की एक्स-रे, इससे सामान्य अर्थराइटिस (Arthritis) का पता लग जाता है
  • रूमेटॉयड अर्थराइटिस के लिए कई तरह की जांचों से इसका पता लगाया जाता है.

गठिया से बचाव (Prevention from Arthritis)

1. जीवनशैली में बदलाव: जिन वज़हों से आपको जोड़ों में दर्द होता है या सूजन आती है वो गतिविधी बंद कर दें।

2. वज़न: अपने वज़न पर नियंत्रण रखना बहुत ज़रूरी हैं। महिलाओं को खासतौर पर अपने वज़न को कम करना चाहिए। साथ ही अपने खान-पान पर नियंत्रण रखें।

3. दैनिक गतिविधि में परिवर्तन: कुछ गतिविधियाँ जैसे सीढियां चढ़ना-उतरना, आलती-पालती कर के बैठना, नीचे बैठना या भारतीय शैली के टॉयलेट का उपयोग करना बंद कर देना चाहिए जिससे जोड़ों पर कम दबाव पड़े।

4. योग व व्यायाम करें: अपनी मांसपेशियों को मज़बूत करने व जोड़ों के दर्द में आराम देने के लिए योग व व्यायाम ज़रूर करें।

5. गर्म या ठंडी सिकाई करें: घुटनों पर या दर्द वाले जोड़ों पर गर्म या ठंडी सिकाई ज़रूर करें ताकि आपको आराम मिले।

गठिया का इलाज (Treatment of Arthritis)

  1. घरेलु उपचार जैसे दिनचर्या में बदलाव अपनाकर
  2. दवाइयों व व्यायाम की सहायता से इसका इलाज किया जा सकता है। ये नॉन-सर्जिकल ट्रीटमेंट में आता है। दर्द व सूजन को कम करने के लिए पेनकिलर दी जाती है।
  3. इंजेक्शन द्वारा: तीन तरह के इंजेक्शन द्वारा इसका इलाज किया जाता है। यह है:
  • स्टेरॉइड्स
  • सप्लीमेंट्स
  • पी.आर.पी.

    4. सर्जिकल ट्रीटमेंट: यह कई प्रकार का हो सकता है जैसे:

  • दूरबीन द्वारा इलाज
  • ओस्टियोटॉमी
  • जॉइंट रिप्लेसमेंट

मेडकॉर्ड्स (MedCords) विशेषज्ञ के अनुसार इन बचाव व इलाज द्वारा आप इस स्थिति से लड़ सकते हैं और असहनीय दर्द से निजात पा सकते है।

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