योग की मदद से बूस्ट करें अपनी मेंटल हेल्थ

21-Day lockdown boost your mental health

देश को कोरोना वायरस के संक्रमण से बचाने के लिए आगामी 21 दिन के लिए लॉकडाउन कर दिया गया है। भारत ही नहीं बल्कि आधा विश्व अपने घरों में कैद है। ऐसे में आपके पास 21 दिन का समय है खुद को जानने का, अपनी शारिरीक क्षमताओं को जानने का और हां- इस वक्त में आप अपनी मेंटल हेल्थ को भी मजबूत कर सकते हैं। जो हमारे जीवन के लिए बहुत ही जरूरी है। आइए जानते हैं योग के माध्यम से अपनी मेंटल हेल्थ को कैसे बूस्ट किया जा सकता है। ?

गरुड़ासन

गरुड़ासन (Garudasana) या ईगल पोज (Eagle Pose), योग विज्ञान का बहुत ही महत्वपूर्ण आसन है। गरुड़ संस्कृत भाषा का शब्द है, इसे हिंदी में चील भी कहा जाता है। गरुड़ को दुनिया भर की सभ्यताओं में बुरी शक्तियों से लड़ने वाले प्रतीक के तौर पर देखा जाता है।

योग​ साइंस के अनुसार, गरुड़ासन खड़े होकर  किए जाने वाले प्रमुख आसनों में से एक है। गरुड़ासन के निरंतर अभ्यास से शरीर को ढेरों फायदे होने के साथ ही अच्छा स्ट्रेच भी मिलता है। गरुड़ासन के अभ्यास से गुर्दे और गुप्त रोगों में भी फायदा मिलता है।   

जब आप इस आसन का अभ्यास करते हैं तो संभव है कि आप खुद को जकड़ा हुआ महसूस करें। लेकिन जब इस आसन को करते हुए अभ्यस्त हो जाएंगे, तब आपके शरीर को यूं महसूस होगा, जैसे आप हवा में उड़ रहे हों, बिल्कुल किसी चील की तरह।

‘हवा में उड़ने’ का अर्थ शरीर के इस स्थिति में आने के बाद होने वाले ऊर्जा के प्रवाह से है। ये प्रवाह, या ऊर्जा आपको स्थिर और मजबूत बनाने के साथ ही मुश्किलों का सामना करने की शक्ति देती है। खासतौर पर उस स्थिति में जब आप कठिनाइयों के बीच में घिरे हुए होंं। 

  • जांघों, हिप्स, अपर बैक और कंधों को स्ट्रेच मिलता है। 
  • ध्यान केंद्रित करने और शरीर का संतुलन बढ़ाता है। 
  • पैरों की मांसपेशियां और कॉफ मसल्स मजबूत होती हैं। 
  • रूमेटिज्म, आमवात, आर्थराइटिस और साइटिका का दर्द कम करता है। 
  • कमर, टांगों और हिप्स को ज्यादा लचीला बनाने में मदद करता है। 
  • ये आसन स्ट्रेस को कम करने में भी मदद करता है। 

अंजनेयासन

अंजनेयासन में शरीर अर्द्धचंद्राकार दिखता है जो पूरे शरीर को एक साथ लाभ देता है। इस आसन का लाभ पाने के लिए आपको संतुलन और संयम के साथ इसे करना चाहिए। इस आसन को अंग्रेजी में क्रिसेंट पोज़  भी कहते है। 

अंजनेयासन कैसे करे?

अंजनेयासन करने के लिए सबसे पहले आप घुटने मोड़कर बैठ जाएं।

उसके बाद बायां पैर पीछे की और ले जाये|

अपने हाथों को ऊपर उठाकर जोड़ लें|

अब धीरे धीरे जितना हो सके पीछे की और झुकें।

उसके पश्चात 2 से 3 मिनट तक इसी मुद्रा में बने रहें।

फिर पहली वाली स्थिति में वापिस आ जाएं|

इसे शुरू करने से पहले रखें इन बातों का ध्यान

इसे हमेशा खाली पेट करना चाहिए।

अंजनेयासन या फिर किसी भी आसन के लिए सुबह का समय अच्छा माना जाता है|

यदि आप इसे शाम के वक्त करते है और यदि आपने कुछ खाया है तो 4 घंटे का अंतराल जरूर होना चाहिए|

अंजनेयासन के लाभ

  1. इसे करने से मसल्स मजबूत होते हैं।
  2. यह आसन साँस लेने में सहायक होता है।
  3. इससे शरीर का संतुलन सुधरता है|
  4. इससे साइटिका की प्रॉब्लम दूर हो जाती है।
  5. यह शरीर में हो रहे दर्द को ठीक कर देता है|
  6. दिमाग को शांत करने में भी यह सहायक है|
  7. शरीर की गर्मी कम करने के लिए यह आसन बहुत लाभदायक है।
  8. यह थाइज, हिप्स और चेस्ट को ओपन करने वाला आसन है|
  9. यह आपके फोकस करने की क्षमता को बढ़ाता है जिससे आपकी एकाग्रता बढ़ती है
  10. अगर आप इस आसन को प्रतिदिन करते है तो इससे आपकी बॉडी टोन होती है और शरीर एनर्जेटिक होता है|
  11. यह आपके ग्लट्स मसल्स और क्वाड्रिसेप्स को मजबूत करता है|
  12. जो लोग बैठने वाला जॉब करते हैं उनके लिए यह आसन बहुत उपयोगी होता है। 

नटराजासन की सरल विधि

  • सबसे पहले आप सीधे खड़े हो जाएं।
  • अब आप अपने दायां पैर को उठाएं, उसे घुटनों से मोड़ें और टखने को दाएं हाथ से पकड़े  और जितना संभव हो पीठ के पीछे ले जाएं।
  • अपने बाएं हाथ को सामने से 45 डिग्री पर ऊपर उठाएं और सीधा खीचें।
  • ध्यान रहे आपका सिर स्थिर और दृष्टि सामने हो।
  • जहाँ तक हो सके इस अवस्था को बनाये रखें और फिर धीरे धीरे आरंभिक स्थिति में आ जाएं।
  • यह आधा चक्र हुआ।
  • इसी तरह से आप बायें पैर से भी इसे करें।
  • अब एक चक्र पूरा हुआ।
  • इस तरह से आप 10 चक्र करें।

नटराजासन के लाभ

नटराजासन योग के बहुत सारे फायदे हैं। यहां पर कुछ महत्वपूर्ण लाभ का वर्णन किया जा रहा है।

  1. वजन कम करने के लिए: इस आसन का नियमित अभ्यास करने से शरीर के विभिन्य हिस्सों से चर्बी को गलाने में मदद मिलती है।
  2. जांघों का मोटापा कम करने के लिए: जांघों की अतरिक्त चर्बी को कम करके इसे शुडाल बनाता है और साथ ही साथ जांघों की मोटापा को भी कम करता है।
  3. एकाग्रता बढ़ाने: इसका अभ्यास करने से एकाग्रता बढ़ती है।
  4. याद्दास्त बढ़ाने : इससे याद्दास्त में इजाफा होता है।
  5. पैरों की मजबूती: इस आसन के करने से आपके पैर मजबूत होते हैं।
  6. बाहों की मजबूती: इसके प्रैक्टिस से आपके बाहें मजबूत एवं शुडूल बनती है।
  7. कैल्शियम के जमने पर रोक:  इस आसन के अभ्यास से आप कंधों एवं मस्तिष्क में कैल्शियम जमा होना  रोक सकते हैं।
  8. संतुलन: यह शरीर के संतुलन को सुधारता है।
  9. घुटने को आराम दिलाना: यह आसन घुटने के लिए  बहुत ही उम्दा आसान है। इसके नियमित अभ्यास से आप अपने घुटने को मजबूत करने के साथ साथ इसके दर्द को भी कम कर सकतें हैं।
  10. तनाव दूर करने के लिए: इसके अभ्यास से आप तनाव को बहुत हद तक कम कर सकते हैं।

वीरभद्रासन:

           यह आसन हाथों, कंधों, जांघों एवं कमर की मांसपेशियों को मजबूती प्रदान करता है। वीरभद्रासन एक संस्कृत का शब्द है जो दो शब्दों से मिलके बना हैं जिससे पहला शब्द ‘‘वीर‘‘ है जिसका अर्थ है ‘‘योद्धा‘‘ और दूसरा शब्द ‘‘भद्र‘‘ है जिसका अर्थ  ‘‘मित्र‘‘ होता है। इस आसन का नाम भगवान शिव के अवतार, एक अभय योद्धा के नाम पर रखा गया। योद्धा वीरभद्र की कहानी, उपनिषद की अन्य कहानियों की तरह, जीवन में प्रेरणा प्रदान करती है।

वीरभद्रासन करने की विधिः

वीरभद्रासन योगासनों से सबसे आकर्षक आसन है। यह योगाभ्यास में सुन्दरता एवं कृतज्ञता लाता है। पैरों को 3 से 4 फुट की दूरी पर फैला कर सीधे खड़े हो जाऐं।

  • दाहिने पैर को 90 डिग्री और बाएं पैर को 45 डिग्री तक घुमाऐं।
  • जांच करें – दाहिना एड़ी बाऐं पैर के सीध में रखें।
  • दोनों हाथों को कंधो तक ऊपर उठाऐं, हथेलिया आसमान की तरफ खुले होने चाहिए।
  • जांच करें – हाथ जमीन के समांतर हो।
  • सांस छोड़ते हुए दाहिने घुटने को मोड़े।
  • जांच करें – दाहिना घुटना एवं दाहिना टखना एक सीध में होना चाहिए। घुटना टखने से आगे नहीं जाना चाहिए।
  • सर को घुमाएं और अपनी दाहिनी ओर देखें।
  • आसन में स्थिर होकर हाथों को थोड़ा और खीचें।
  • धीरे से श्रोणि को नीचे करें। एक योद्धा की तरह इस आसन में स्थिर रहें और मुस्कुराते रहें। नीचे जाने तक सांस लेते और छोड़ते रहें।
  • सांस लेते हुए ऊपर उठें।
  • सांस छोड़ते वक्त दोनों हाथों को बाजू से नीचे लाए।
  • बाएं तरफ से इसे दोहराएं।
  •  

वीरभद्रासन से लाभ:-

  • हाथ, पैर और कमर को मजबूती प्रदान करता है।
  • शरीर में संतुलन बढाता है, सहनशीलता बढती है।
  • बैठ कर कार्य करने वालों के लिए अत्यन्त लाभदायक है।
  • कंधो के जकड़न में अत्यन्त प्रभावशाली है। 
  • कंधो के तनाव को तुरंत मुक्त करता है।
  • साहस, कृपा एवं शांति की वृद्धि करता है।

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